Friday, June 18, 2010

कब होता है

जो हम चाहें कब होता है
सब पा जायें, कब होता है

चलते चलते बीतें उम्रें
दर आ जाये, कब होता है

पोथे-पत्री कर्म-काण्ड में
रब मिल जाये, कब होता है

जीवन हो चाहे कितना लम्बा
मौत न आये, कब होता है

दौलत-डिग्री-ओहदे देखें
दिल दिख जाये, कब होता है

खुद को भूलूँ, है आसाँ लेकिन
तू याद न आये, कब होता है

अच्छा हो या बुरा हो लम्हा
बीत न जाये, कब होता है

dreamt before

Related Posts Widget for Blogs by LinkWithin