Showing posts with label gazal. Show all posts
Showing posts with label gazal. Show all posts

Tuesday, September 27, 2011

doosron ko itna padha, khud ko likhna bhoola main// दूसरों को इतना पढ़ा, खुद को लिखना भूला मैं


दूसरों को इतना पढ़ा, खुद को लिखना भूला मैं
कभी तो घर आऊँगा, सुबह का भटका-भूला मैं

doosron ko itna padha, khud ko likhna bhoola main
kabhi to ghar aaoonga, subah ka bhatka-bhoola main

दुनिया के इस मेले में, रोज़ नए दोस्त बनते हैं
कितनों को मैं याद नहीं, कितनों को हूँ भूला मैं

duniya ke is mele mein, roz naye dost bante hain
kitno ko main yaad nahi, kitno ko hoon bhoola mein

रोज़ सुबह अख़बार उठाकर, दुनिया को मैं जलता देखूं
खुद की छोटी चोट बड़ी है, दुनिया भर को भूला मैं

roz subah akhbar uthakar, duniya ko main jalta dekhoon
khud ki chhoti chot badi hai, duniya bhar ko bhoola main

30 बरस के इस जीवन में, अपनों ने कई ज़ख्म दिए
तेरे प्यार के मलहम से, हर उस ज़ख्म को भूला मैं

30 baras ke is jeevan mein, apno ne kayi zakhm diye
tere pyaar ke malham se, har us zakhm to bhoola main

बाहर बारिश झूम रही है, कोयल तितली बच्चे भी
बड़े बड़े 'टारगेट्स' के पीछे, छोटी खुशियाँ भूला मैं

bahar barish jhoom rahi hai, koyal title bacche bhi
bade bade 'targets' ke peeche, choti khushiyan bhoola main

तूने ही गम दिए हैं, तू ही देगा खुशियाँ भी
छोटी-मोटी तेरी भूलें, मौला सारी भूला मैं

toone hi gum diye hain, tu hi dega khushiyan bhi
choti-choti teri bhoolein, maula sari bhoola main

Thursday, June 16, 2011

सूरज चंदा जैसी जोड़ी हम दोनों


सूरज चंदा जैसी जोड़ी हम दोनों
दिन का राजा रात की रानी हम दोनों

जगमग जगमग दुनिया का मेला झूठा
सच्चा सोना, सच्ची चांदी हम दोनों

इक दूजे से मिलकर पूरे होते हैं
आधी-आधी एक कहानी हम दोनों

चारों ओर समंदर बढ़ती चिंता का
लहर लहर लहराती कश्ती हम दोनों

पर्वत-पर्वत, बादल-बादल, किरन-किरन
उजले पर वाले दो पंछी हम दोनों

मैं दहलीज़ का दीपक हूँ आ तेज़ हवा
रात गुजारें अपनी-अपनी हम दोनों

घर-घर दुःख-सुख का इक दीपक जले-बुझे
हर दीपक में तेल और बाती हम दोनों

दुनिया की ये माया कंकर-पत्थर है
आंसू-शबनम हीरा-मोती हम दोनों


-बशीर बद्र

Thursday, May 19, 2011

बस यही मेरी सज़ा, मेरा नसीब भी है


बस यही मेरी सज़ा, मेरा नसीब भी है
मेरा साया ही मेरा रकीब भी है

मुझे न समझाइये इबादत के मानी
वो ही दुआ मेरी, वो ही सलीब भी है

कुछ ऐसा रिश्ता रहा दरम्यान तेरे-मेरे
तू ही दूर सब से, तू ही करीब भी है

अजीब शख्स है, जो आईने से झांकता है
पूरा वहशी सही, थोड़ा अदीब भी है

हरेक लिहाज से तू बेहतर सही मुझसे
बिना मेरे, तू थोड़ा ग़रीब भी है

Wednesday, April 27, 2011

मौला

कैसी लिखी तक़दीर मौला
पानी पे खिंची लकीर मौला

हँसते-हँसते भूल गया वो
अश्कों की तासीर मौला

मुझ में, तुझ में, सब में वो है
गाता गया फ़कीर मौला

जितना बाँटू, बढ़ता जाये
दिल तो बड़ा अमीर मौला

26 बरस की सीधी गुड़िया
आँखें बड़ी शरीर मौला

अबके बरस वो मिल जाये मुझको
कर कुछ ये तदबीर मौला

Tuesday, July 27, 2010

अपने घर का

न रहा नामो-निशाँ अब अपने घर का
अजनबियों से पूछता हूँ, पता अपने घर का

इश्क ने मुझे दो जहाँ की दौलत वारी
आफ़ताब* अपने घर का, महताब** अपने घर का

अजब लोग इस शहर के, अजब आशनाई^
वक़्त पर न खोला किसी ने, दर अपने घर का

हर एक शख्स की चाहत अपनी, इबादत अपनी
शेख^^ अपने घर का, रिंद*^ अपने घर का

ज़मीन पैरों तले और आसमाँ ऊपर
बस यही है रक्ब^* अब अपने घर का

ये न समझे खुदा, के भूला हुआ हूँ मैं
मुझे पता है असली, पता अपने घर का

तुझसे मिला जब, महसूस हुआ मुझे
पूरा हुआ है ख्वाब, अब अपने घर का

*आफताब- सूरज, sun ; **महताब- चाँद, moon ; ^आशनाई- मेल-मिलाप, cordiality ; ^^शेख- धार्मिक व्यक्ति, religious individual ; *^रिंद- शराबी, drunkard; ^*रक्ब- क्षेत्रफल, area

Thursday, July 01, 2010

मुश्किल तो नहीं, आसाँ भी नहीं

आँखों में नमी, होठों पर हंसी, मुश्किल तो नहीं, आसाँ भी नहीं
यूं घुट-घुट कर जीते जाना, मुश्किल तो नहीं, आसाँ भी नहीं

है वक़्त एक साया क़ातिल का, साथ मेरे जो चलता है
क़ातिल से करूँ मैं याराना, मुश्किल तो नहीं, आसाँ भी नहीं

वो शोख हसीं जब नज़रें उठा, यूँ तीर निशाने पर छोड़े
दिल मेरे तेरा अब बच पाना, मुश्किल तो नहीं, आसाँ भी नहीं

ये रंग बदलती दुनिया है, यहाँ रोज ही यार bichadte हैं
ऐसे में तेरा मुझे मिल जाना, मुश्किल तो नहीं, आसाँ भी नहीं

कुछ अंजाना सा रिश्ता है, मेरे खुदा, तुझ में, मुझ में
इस रिश्ते को झुठला पाना, मुश्किल तो नहीं, आसाँ भी नहीं

हम इश्क-तबीयत वाले लोग, कलम कहाँ साथ में रखते हैं
आहों से ग़ज़ल बुनते जाना, मुश्किल तो नहीं, आसाँ भी नहीं
 
यहाँ मीठी सलाखें सपनों की, और दाना-पानी रिश्तों का
इस क़फ़स* से यूँ उड़ कर जाना, मुश्किल तो नहीं, आसाँ भी नहीं
*पिंजरा

Friday, June 18, 2010

कब होता है

जो हम चाहें कब होता है
सब पा जायें, कब होता है

चलते चलते बीतें उम्रें
दर आ जाये, कब होता है

पोथे-पत्री कर्म-काण्ड में
रब मिल जाये, कब होता है

जीवन हो चाहे कितना लम्बा
मौत न आये, कब होता है

दौलत-डिग्री-ओहदे देखें
दिल दिख जाये, कब होता है

खुद को भूलूँ, है आसाँ लेकिन
तू याद न आये, कब होता है

अच्छा हो या बुरा हो लम्हा
बीत न जाये, कब होता है

Wednesday, December 09, 2009

kahani

*दिहाड़ी मजदूर की
खून, पसीने का

बिगड़ा ही सही बेटा,
टुकड़ा सीने का

बच्चों की ज़िद
अंत महीने का

रात की डिब्बी
चाँद मीने** का

गम हो साकी^
मज़ा पीने का

घाव इश्क का
छेद सफीने^^ का

कीचड़ में कमल
फ़लसफ़ा*^ जीने का

खुदा काशी का
राम मदीने^* का

*दिहाड़ी - daily wages; **मीनाकारी - art of embellishment on solid surfaces; ^साकी - the cup bearer (bartender); ^^सफीने - boat; *^फ़लसफ़ा - philosophy; ^*मदीना - the Islamic holy city of Madina (with Kashi of Hinduism)

as of now, no English translation. working on it. begging, pleading, cajoling the benevolent powers involved :)

Wednesday, November 18, 2009

this city / ye shehar

यहाँ ऊंची-गहरी हैं इमारतें, यहाँ अंधे-कुएं हैं रास्ते
ये शहर बहुत ज़हीन है, यहाँ सर झुका कर चला करो

यहाँ दोस्त ही रकीब हैं, यहाँ सब के काँधे सलीब हैं
ग़र कोई हंस के मिले भी तो, ज़रा डरते-डरते मिला करो

यहाँ पैदल चलना गुनाह है, हर गाड़ी वाला खुदा है
जब पार करो सड़क कोई, हर कदम संभल कर रखा करो

यहाँ दौड़ती-भागती तिशनगी, कहीं थक के बैठी ज़िन्दगी
हर ख्वाब इश्तेहार है, उसे जेब में रखा करो

translation in English, courtesy this fabulous blogger :)

through the sky scrapers
and blind alleys
you must walk alike
with a bowed head as you come
and welcome to the city where culture rose

of all the smiling faces you behold
bear those smiles
like you bore the cross
with a guarded heart as you greet
and welcome to the city of friendly foes

lords spin the lofty wheels of fortune
as men travel on foot
burdened with sins
watch your step as you cross this road
and welcome to the city of deathly blows

desire desolves and sanity yearns
as it revolves never to return
harried life waits forlorn
with the pamphlets of dreams stuck within
and welcome to the city of eternal gloss

dreamt before

Related Posts Widget for Blogs by LinkWithin